हरिद्वार:
शासन के पत्र संख्या 279 दिनांक 31 मार्च, 2022 के क्रम में मा.उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में योजित याचिका संख्या 539/2020 श्री गौरव कुमार बंसल बनाम भारत सरकार व अन्य मिस्लेनियस एपलीकेशन संख्या 1805/2021 में पारित निर्देश दिनांक 14.03.2022 एवं दिनांक 24.03.2022 के क्रम में कोविड-19 संक्रमण से मृतक के विधिक वारिसजनों को आपदा मोचन निधि योजना के अंतर्गत राहत एवं बचाव मद से शर्तो एवं प्रतिबन्धों के अधीन प्रति मृतक रू0 50 हजार की धनराशि का भुगतान आवेदन प्राप्त होने के 30 दिन के अन्दर अनिवार्य रूप से आधार लिंक बैंक खाते में डी बी टी माध्यम से किये जाने के निर्देश प्राप्त है तथा जनपद स्तर पर कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के विधिक वारिसानों द्वारा सहायता राशि हेतु किये गये आवेदन के क्रम में जिलाधिकारी के स्वीकृति के अनुपालन में सहायता राशि दी जा रही है।
प्रभारी अधिकारी ने यह भी अवगत कराया है कि मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक 14.03.2022 एवं दिनांक 24.03.2022 को पारित आदेश के क्रम में दिनाक 20.03.2022 से पूर्व कोविड-19 के कारण मृत्यु होने की स्थिति में सहायता राशि के दावों को दर्ज/आवेदन करने के लिए 60 दिन तथा दिनांक 20.03.2022 के बाद कोविड-19 के कारण मृत्यु होने की स्थिति में सहायता राशि के दावों को दर्ज/ आवेदन करने के लिए मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश की तिथि से 90 दिन की समय सीमा निर्धारित की गयी है। कोविङ-19 से मृत व्यक्तियों के विधिक वारिसानों से आवेदन प्राप्ति के 30 दिनों की अवधि के भीतर सहायता राशि का भुगतान करने हेतु पूर्व आदेश को यथावत रखने का आदेश दिया गया है । मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में जनपद में कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के विधिक वारिसान, जिन्होंने अभी तक सहायता राशि हेतु आवेदन नहीं किया है, उन्हें मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन दिनाक 20.03.2022 से पूर्व कोविड-19 के कारण मृत्यु होने की स्थिति में 60 दिन अर्थात दिनाक 22.05.2022 तक तथा दिनांक 22.03.2022 के बाद कोविड-19 के कारण मृत्यु होने की स्थिति में 90 दिन अर्थात दिनांक 21.06.2022 तक निर्धारित समय सीमा के भीतर सहायता का भुगतान किया जाना अनिवार्य है, उसके बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जायेगा। अपरिहार्य कारणों से निर्धारित समय सीमा के अन्तर्गत यदि कोई आवेदन प्राप्त नहीं हो पाते है, तो ऐसी स्थिति में आवेदक शिकायत निवारण समिति को अपना आवेदन प्रस्तुत करेंगे तथा शिकायत निवारण समिति द्वारा आवेदन का परीक्षण कर सहायता राशि हेतु निर्णय लिया जायेगा।
सहायता राशि हेतु झूठा व फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर सहायता राशि अन्य लाभ प्राप्त करना दण्डनीय अपराध है। ऐसे प्रकरण संज्ञान में आने या दोष सिद्ध होने पर राज्य सरकार, राज्य प्राधिकरण, जिला प्राधिकरण को दोषी के विरुद्ध आपदा प्रबन्धन अधिनियम, 2005 की धारा 52 के तहत 02 वर्ष का कारावास सहित जुर्माने से दण्डित किये जाने का प्रावधान है।

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