हरिद्वार, 6 अगस्त। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा है कि श्रावण मास भगवान शिव की आराधना और प्रकृति के प्रति मनुष्य के प्रेम को समर्पित है। जो भक्त श्रावण मास में सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ महादेव का व्रत धारण करता है। उसे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसकी सभी मनोकामनाएं भगवान आशुतोष पूर्ण करते हैं। नीलधारा तट स्थित श्री दक्षिण काली मंदिर में पूरे श्रावण मास चलने वाली विशेष शिव आराधना के दौरान श्रद्धालु भक्तों को शिव महिमा का सार समझाते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि भगवान शिव अत्यंत दयालु और कृपालु देव हैं। जो भक्तों की सूक्ष्म आराधना से ही प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। भगवान शिव की आराधना व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि लाती है और उसका जीवन सदैव उन्नति की ओर अग्रसर रहता है। अपनी शरण में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु भक्त का संरक्षण कर महादेव उन्हें भवसागर से पार लगाते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ प्रत्येक श्रद्धालु भक्तों को प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। प्रकृति मानव जाति को मिला हुआ अतुल्य वरदान है। प्रकृति के कारण ही पृथ्वी पर मानव जीवन संभव है। मानव और प्रकृति मे बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सभी को अधिक से अधिक पौधारोपण करना चाहिए। पेड़ पौधे हमें प्राणवायु ऑक्सीजन प्रदान करतें हैं। इसलिए हमें भी प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव रखकर इसके संरक्षण संवर्धन के लिए तत्पर रहना चाहिए।

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