हरिद्वार समाचार -श्री पंचदशनाम आह्वान अखाड़े के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत सत्यगिरी महाराज ने अखाड़े के संतों के साथ ज्वालापुर के पाण्डेवाला स्थित गुघाल मंदिर पहुंचकर निरीक्षण किया और पंचायती धड़ा फिराहेड़ियान के पदाधिकारियों से पांच मार्च को निकलने वाली पेशवाई की तैयारियों पर चर्चा की। श्रीमहंत सत्यगिरी ने कहा कि प्राचीन समय से ही अखाड़े की पेशवाई प्राचीन गुघाल मंदिर से रवाना होती रही है। इस वर्ष हो रहे कुंभ में भी अखाड़े के रमता पंचों के नेतृत्व में गुघाल मंदिर से भव्य पेशवाई निकाली जाएगी। ज्वालापुर के विभिन्न बाजारों से होते हुए पेशवाई अखाड़े की छावनी पहुंचेगी। इस दौरान सिद्ध महापुरूषों के दिव्य दर्शनों का लाभ श्रद्धालु भक्तों को प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि प्राचीन गुघाल मंदिर में बिजली, पानी, साफ सफाई की समुचित व्यवस्थाएं की जा रही हैं। कुंभ मेला सनातन धर्म व भारतीय संस्कृति का प्रमुख पर्व है। कुंभ मेले के दौरान देश भर से करोड़ों श्रद्धालु व लाखों संत हरिद्वार आकर गंगा स्नान करते हैं। अखाड़े के संरक्षक श्रीमहंत नीलकंठ गिरी महाराज महाराज ने कहा कि परंपराओं के अनुरूप अखाड़े की भव्य पेशवाई की तैयारियां की जा रही हैं। कुंभ के दौरान हरिद्वार के गंगा तटों पर लगने वाले विशाल संत समागम के माध्यम से आध्यात्मिक संदेश देश दुनिया को नई दिशा प्रदान करेगा। सभापति श्रीमहंत पूनम गिरी महाराज ने कहा कि कुंभ के दौरान निकलने वाली अखाड़े की पेशवाई व अन्य कार्यक्रमों के दौरान कोरोना गाइड लाईन व अन्य सभी नियमों का पालन किया जाएगा। कुंभ मेला प्रशासन अपनी तैयारियां कर रहा है। वहीं अखाड़े भी बाहर से आने वाले संतों तथा श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां कर रहे हैं। पंचायती धड़ा फिराहेड़ियान के अध्यक्ष महेश तुंबड़िया, महामंत्री उमाशंकर वशिष्ठ, कोषाध्यक्ष सचिन कौशिक ने कहा कि पेशवाई के दौरान तीर्थ पुरोहित समाज की ओर से सभी संत महापुरूषों का भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके लिए सभी तैयारियां की जा रही हैं। संतों की सुविधा के लिए शौचालय, पेयजल, बिजली आदि की सभी व्यवस्थाएं की गयी हैं। संत महापुरूष सभी के पूज्यनीय हैं। उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग गुघाल मंदिर से पेशवाई निकाले जाने का लेकर अनावश्यक रूप से भ्रम फैला रहे हैं। आदि अनादि काल से प्राचीन गुघाल मंदिर से ही पहली पेशवाई निकलती रही है। इस परंपरा का पालन तीर्थ पुरोहित समाज वर्षो से करता चला आ रहा है। इस दौरान श्रीमहंत कैलाशपुरी, राजेश गिरी, श्रीमहंत ऋषिराज पुरी, राजेंद्र भारती, राजेश गिरी, महंत भगीरथ गिरी आदि संतों के अलावा प्रदीप निगारे, अनिल कौशिक, संजय खजानके, विपुल मिश्रोटे आदि सहित कई तीर्थ पुरोहित मौजूद रहे।

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