हरिद्वार, 12 अप्रैल। महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि महाराज ने कहा है कि श्रीमद् भागवत कथा भवसागर की वैतरणी है। जो व्यक्ति के मन से मृत्यु का भय मिटाकर उसके बैकुंठ का मार्ग प्रशस्त करती है। जो श्रद्धालु भक्त कथा का रसपान कर लेता है। उसका जीवन भवसागर से पार हो जाता है। भूपतवाला स्थित कल्याण कमल आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा पतित पावनी मां गंगा की भांति बहने वाली ज्ञान की अविरल धारा है। जिसे जितना ग्रहण करो उतनी ही जिज्ञासा बढ़ती है और प्रत्येक सत्संग से अतिरिक्त ज्ञान की प्राप्ति होती है। इसलिए समय निकालकर सभी को कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए और औरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा देवताओं को भी दुर्लभ है। सौभाग्यशाली व्यक्ति को ही कथा श्रवण का अवसर प्राप्त होता है। कथा व्यास आचार्य पंडित सुभाष शर्मा सहारनपुर वाले ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कल्पवृक्ष के समान है। जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है और कथा श्रवण से व्यक्ति के उत्तम चरित्र का निर्माण होता है। जिससे वह स्वयं को सबल बना कर अपने कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। वास्तव में सभी ग्रंथों का सार श्रीमद्भागवत कथा में निहित है और कथा मोक्षदायिनी है। जो श्रद्धालु भक्त नियमित रूप से कथा का श्रवण करता है। उसके जन्म जन्मांतर के पापों का विनाश हो कर लौकिक और भौतिक विकास होता है। प्रभु श्री हरि हृदय में आ बसते हैं और व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

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