हरिद्वार समाचार– जयराम पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि हाल ही में लागू किए गए कृषि कानूनों के जरिए केंद्र सरकार किसानों को काॅरपोरेट घरानों का बंधुआ मजदूर बनाना चाहती है। कृषि कानून पूरी तरह उद्योपगतियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं। कानूनों के लागू होने पर किसान आर्थिक रूप से और अधिक कमजोर होगा तथा कर्ज के जाल में फंसकर अपनी जमीनें भी गंवा बैठेगा। उन्होंने कहा कि किसानों का अहित नहीं होने दिया जाएगा। कांग्रेस सदन से सड़क तक किसानों के लिए संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही कृषि मण्डियों में अपनी उपज को खुले रूप से बेचते आए हैं।

नए कृषि कानूनों में किसान के हित के लिए कुछ भी नहीं है। बल्कि उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए कानून लागू कर किसानों को कमजोर करने का कार्य किया जा रहा है। नए कृषि कानून लागू होने पर किसान के साथ मण्डीयों में काम करने वाले आढ़ती व मजूदर भी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि भारत कृषि प्रधान है। देश के अन्नदाता के साथ होने वाले अन्याय को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के चलते देश का किसान आंदोलन करने को मजबूर है। किसानों की आय दोगुनी करने के नाम पर लाए गए कानूनों के दुष्प्रभाव सामने आने शुरू हो गए हैं। खरीद केंद्रों पर फसल बेचने आ रहे किसानों को भटकाया जा रहा है। मजबूरन किसान एमएसपी से कम दामों पर फसल बेच रहे हैं। केंद्र व प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों से समाज का प्रत्येक वर्ग निराश है। महंगाई व बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है।

सब्जी, खाद्यान्न जैसी जरूरी चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। गृहणियों के लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है। नए कृषि कानून में स्टाॅक लिमिट खत्म होने से आम उपभोक्ता भी प्रभावित होंगे। जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे गरीब वर्ग के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होने विभिन्न राज्यों मे हो रही संतो की हत्याओं पर गहरा दुख जताया ओर कहा कि महाराष्ट्र के पालघर सहित कई प्रदेशों में संतों की हत्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। संतों की सुरक्षा को लेकर सरकारों को गमभीरता से काम करना होगा। संत समाज सदैव ही सनातन परम्पराओं का प्रचार प्रसार कर धर्म की पताका को देश दुनिया में प्रचारित कर रहे है। ऐसे में संतों की हत्या होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को संतों की सुरक्षा के लिए कारगर कदम उठाने चाहिए।

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