हरिद्वार– निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति में उत्तम चरित्र का निर्माण होता है। जिससे वह स्वयं को सबल बनाकर अपने कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। भूपतवाला स्थित श्री तुलसी मानस मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बतौर मुख्य अतिथि श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहां कि श्रीमद् भागवत कथा भक्तों को अमोघ फल प्रदान करती है। अश्वमेघ और वाजपेय यज्ञ से भी अधिक हितकारी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान का भंडार है। जिसके श्रवण से व्यक्ति का जीवन बदल जाता है। इसलिए सभी को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। स्वामी अर्जुन पुरी महाराज वृद्धावस्था में भी धर्म के प्रचार प्रसार के माध्यम से लोगों को लाभान्वित कर रहे हैं। संत समाज ईश्वर से इनकी दीर्घायु की कामना करता है। तुलसी मानस मंदिर के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी अर्जुनपुरी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत भगवान श्रीकृष्ण की पवित्र वाणी है। जो व्यक्ति के जीवन में धार्मिक ऊर्जा का संचार करती है। संत समाज के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन और श्रवण सौभाग्यशाली व्यक्ति को ही प्राप्त होता है। कथा व्यास आचार्य देवेंद्र शास्त्री मंदसौर मध्य प्रदेश वालों ने श्रद्धालु भक्तों को कथा की महत्वता बताते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से राजा परीक्षित को भी मोक्ष की प्राप्ति हुई थी और वर्तमान में भी इसके साक्षात प्रमाण देखने को मिलते हैं। श्रीमद्भागवत कथा देवताओं को भी दुर्लभ है। कथा में निहित सार को अपने जीवन व्यवहार में शामिल कर अपनों से बड़ों का सम्मान करना चाहिए। गुरुजनों का आदर और माता-पिता का सम्मान ही व्यक्ति को यश वैभव और कीर्ति प्रदान करता है। हम सभी को समाज में फैली कुरीतियों से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण में अपना सहयोग प्रदान करना चाहिए। इस अवसर पर कथा में पधारे सभी संत महापुरुषों का मुख्य यजमान रामेश्वर सोडाणी, सुरेश सोडाणी, सत्यनारायण सोडाणी, महेशचंद सोडाणी, नरेश निगम ने स्वागत किया। इस दौरान स्वामी रवि देव शास्त्री, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेशदास, महंत निर्मलदास, महंत प्रह्लाद दास, महंत दुर्गादास, स्वामी राजेश्वरानंद, महंत शिवानंद, महंत कृष्ण देव सहित कई संत महापुरुष उपस्थित रहे।

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