हरिद्वार– श्रीमद् भागवत कथाव्यास आचार्य मुकेश भारद्वाज ने कहा है कि श्रीमद् भागवत साक्षात भगवान का स्वरूप है। जिसके पठन एवं श्रवण से भोग और मोक्ष दोनों सुलभ हो जाते हैं। मन की शुद्धि के लिए भागवत से बड़ा कोई साधन नहीं है। भूपतवाला स्थित जांगिड़ सेवा सदन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चैथे दिन श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए कथा व्यास आचार्य मुकेश भारद्वाज ने कहा कि श्रीमद् भागवत के पाठ से कलयुग के समस्त दोष नष्ट हो जाते हैं और कथा के श्रवण मात्र से प्रभु श्री हरि हृदय में आ बसते हैं। हजारों अश्वमेघ और वाजपेई यज्ञ इसका अंश मात्र भी नहीं है। फल की दृष्टि से भागवत की समानता काशी पुष्कर या प्रयाग कोई भी तीर्थ नहीं कर सकता। इसलिए सभी को समय निकालकर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। क्योंकि इसके श्रवण से मन का शुद्धिकरण होता है और व्यक्ति के विचारों में सार्थकता आती है। आचार्य आनंद बेलवाल ने कहा कि श्रीमद् भागवत भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य वाणी है। जो व्यक्ति का जीवन भवसागर से पार लगाती है। भगवान श्रीकृष्ण की लीला अपरंपार है। भगवान श्रीकृष्ण जैसे समाज सुधारक, मार्गदर्शक, योगी एवं मित्र इस पृथ्वी पर दुर्लभ ही हंै। जिस घर में भागवत कथा का आयोजन होता है। वह तीर्थरूप हो जाता है। पठन श्रवण ही पर्याप्त नहीं। इसके साथ अर्थबोध, चिंतन, मनन, धारण और आचरण भी आवश्यक है। श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से जो फल अनायास ही सुलभ हो जाता है। वह अन्य साधनों से दुर्लभ ही रहता ह। वस्तुतः जगत में शुक कथा भागवत शास्त्र से निर्मल कुछ भी नहीं है। इसलिए भागवत रस का पान सभी के लिए सर्वदा हितकारी है। इस अवसर पर आचार्य विष्ण,ु आचार्य अनुपम, आचार्य शैलेंद्र, विनोद शर्मा, रितु शर्मा, अमित शर्मा, प्रतिभा शर्मा, राजीव शर्मा, निधि शर्मा, शुभ शर्मा, शिव शर्मा आदि मौजूद रहे।

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