हरिद्वार– रामकिशन धाम आश्रम के अध्यक्ष दिगंबर गंगागिरी महाराज ने कहा है कि राष्ट्र की एकता अखंडता बनाए रखने में संत महापुरुषों ने सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है और उत्तराखंड के संतों ने विश्व पटल पर भारत का जो स्वरूप प्रस्तुत किया है, वह सराहनीय है। कनखल स्थित आश्रम में ब्रह्मलीन महंत डोंगर गिरी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए दिगंबर गंगागिरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत डोंगर गिरी महाराज एक युगपुरुष थे। जिनका सादगी पूर्ण जीवन सभी को अभिभूत करता था। उन्होंने अपने जीवन काल में गौ, गंगा एवं गायत्री का प्रबल रूप से समर्थन किया और मानवता को सदैव समर्पित रहे। राष्ट्र निर्माण में उनका अतुल्य योगदान सभी को स्मरण रहेगा। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन महंत डोंगर गिरी महाराज के आदर्श पूर्ण जीवन से प्रेरणा लेकर युवा संतो को राष्ट्र रक्षा एवं धर्म रक्षा के लिए समर्पित रहना चाहिए। श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी महाराज ने कहा कि महापुरुषों का बलिदान सदैव समाज के हित में होता है। ब्रह्मलीन महंत डूंगर गिरी महाराज का जीवन सदैव निर्मल जल के समान रहा और उन्होंने जीवन पर्यंत सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए युवा संतो को जागृत किया। ऐसे महापुरुषों को संत समाज नमन करता है। स्वामी आलोक गिरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत डोंगर गिरी महाराज ने अपने तप एवं विद्वत्ता के माध्यम से युवा पीढ़ी को संस्कारवान बना कर समाज सेवा के लिए प्रेरित किया और सदैव गरीब असहाय लोगों की सहायता कर समाज को मानव सेवा का संदेश दिया। समाज कल्याण मैं उनका अभूतपूर्व योगदान संत समाज सदैव स्मरण करता रहेगा। इस अवसर पर श्रीमहंत ओंकार गिरी, दिगंबर आशुतोष पुरी, दिगंबर राजगिरी, दिगंबर पवन गिरी, दिगंबर लक्ष्मण गिरी, स्वामी रघु वन, स्वामी रवि वन, दिगंबर जितेंद्र गिरी, दिगंबर तुलसी गिरी, दिगंबर सुधीर गिरी, दिगंबर सत्येंद्र गिरी, दिगंबर सत्यानंद गिरी, पंडित शिव नारायण शर्मा, महंत मोहन सिंह, महंत तीरथ सिंह, दिगंबर विनोद गिरी, एसएमजेएन पीजी कॉलेज के प्राचार्य डा.सुनील बत्रा सहित कई संत महापुरुष उपस्थित रहे।

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