हरिद्वार समाचार-

 भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज ने कहा है कि श्रीमद् भागवत कथा पतित पावनी मां गंगा की भांति बहने वाली ज्ञान की अविरल धारा है। जिसे जितना ग्रहण करो उतनी ही जिज्ञासा बढ़ती है और व्यक्ति के सभी मनोविकार दूर होते हैं। उक्त उद्गार भूमापीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज ने भूपतवाला स्थित श्री भूमा निकेतन घाट पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान का भण्डार है। कथा के श्रवण से व्यक्ति में उत्तम चरित्र का निर्माण होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। राजा परीक्षित को भी श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से मोक्ष की प्राप्ति हुई थी और कलयुग में आज भी इसके साक्षात प्रमाण देखने को मिलते हैं। सभी ग्रंथों का सार श्रीमद् भागवत कथा मोक्षदायिनी है। कथा व्यास आचार्य वेदप्रकाश ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से व्यक्ति परमात्मा की शरण में पहुंचता है। श्रीमद् भागवत देवताओं को भी दुर्लभ है। सौभाग्यशाली व्यक्ति को ही कथा सुनने का अवसर प्राप्त होता है। वास्तव में श्रीमद् भागवत कथा हमें जीवन जीने की कला सिखाती है और कथा की सार्थकता तभी है जब हम इसमें निहित सार को अपने जीवन आदर्शों में अपनाएं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति पाश्चात्य संस्कृति की ओर दौड़ रहा है। हमें इसका त्याग कर भारतीय संस्कृति को अपनाना चाहिए और सनातन धर्म से प्रेरणा लेकर मानव सेवा एवं राष्ट्रहित में समर्पित रहना चाहिए। यही सत्य सनातन धर्म का उपदेश है। इस अवसर पर सुरेश शर्मा, हरिओम शर्मा, विजय शर्मा, देवराज तोमर, सुनील कुमार, विदित शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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