hwr-19-1-21-3-हरिद्वार नगरी एक पौराणिक नगरी होने के साथ-साथ हिन्दुओं की धार्मिक आस्था का केन्द्र भी है, जिसके मूल में माॅ गंगा का पवित्र जल है, जो निरन्तर प्रवाहित होता रहता है। देश-विदेश विभिन्न धार्मिक उत्सवों, अमावस्या स्नान, पूर्ण मासिक स्थान, कुम्भ मेला, कांवड मेला एवं प्रति दिन गंगा स्नान हेतु हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन हरिद्वार तीर्थ नगरी में होता रहता है। हरिद्वार तीर्थ नगरी में आने वाले प्रत्येक यात्री एवं श्रद्धालुओं की इच्छा होती है कि उसके द्वारा हरिद्वार तीर्थ नगरी में प्रवाहित गंगा नदी में स्नान कर पुण्य की प्राप्ति करे। हम सभी का दायित्व है कि गंगा नदी में स्नान करने वाले यात्री एवं श्रद्धालुओं को गंगा में स्नान करते समय धार्मिक एवं मानसिक, शारीरिक रूप से सुखद अहसास हो। यह तभी सम्भव हो पायेगा जब गंगा जल पूर्णतः साफ, निर्मल एवं शुद्ध हो। इसके लिए आवश्यक होगा कि गंगा जल में स्नान हेतु चिन्हित स्थलों/गंगा घाटों पर पूर्णतः साफ-सफाई, मूलभूत सुविधा युक्त एवं धार्मिक भावनाओं से युक्त हो।
कार्यक्रम निदेशक, राज्य परियोजना प्रबन्धन ग्रुप, नमामि गंगे, देहरादून, उत्तराखण्ड के पत्रांक  957/SPMG/NGRBA/RPD/35,  दिनांक 02.08.2018 द्वारा जिलाधिकारी/अध्यक्ष, जिला गंगा संरक्षण समिति, हरिद्वार को निर्देशित किया गया कि स्थानीय निकाय/पंचायती राज स्ंस्थान अथवा इच्छुक गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा घाटाों के रख-रखाव की व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने के प्रस्ताव पर स्थानीय स्तर पर आम सहमति बनाये ताकि तद्नुसार इन घाटों को  ESCROW किये जाने की कार्यवाही समयान्तर्गत पूर्ण की जा सके। मा0 मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में नमामि गंगे के कार्यो की समीक्षा बैठक दिनांक 27.11.2018 में भी मा0 मुख्यमंत्री  द्वारा भी निर्देश दिये गये कि पूर्ण एवं निर्माणाधीन घाटों के रख-रखाव हेतु व्यवस्था स्थानीय प्राधिकारियों यथा नगर निगम, नगर पालिका परिषद व ग्रामीण क्षेत्रों में जिला पंचायत/ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाये।
वर्तमान में नमामि गंगे कार्यक्रम के अन्तर्गत हरिद्वार में 72 घाटों की साफ-सफाई का कार्य नगर निगम, हरिद्वार के द्वारा मै0 आकांक्षा एटंरप्राईजेज द्वारा माह मार्च 2019 से किया जा रहा है। मा0 मुख्यमंत्री  एवं एस0पी0एम0जी. द्वारा दिये गये निर्देशों के क्रम में जिला गंगा संरक्षण समिति, हरिद्वार द्वारा निर्णय लिया गया कि इच्छुक स्वयं सेवी संस्था, सरकारी एवं गैर सरकारी संस्था, व्यक्ति विशेष आदि द्वारा भी गंगा घाटों के रख-रखाव, साफ-सफाई आदि के प्रबन्धन हेतु अधिकतम तीन वर्ष के लिए दिया जा सकता है, जिससें गंगा घाटों के रख-रखाव एवं साफ-सफाई हेतु जन सहभागिता का भी सदुपयोग किया जा सके। गंगा घाटों को प्रबन्धन हेतु लेने के इच्छुक संस्था/व्यक्ति विशेष से अपेक्षा की जाती है कि निम्न निर्धारित शर्तो का पूर्णतः पालन करेगे।
गंगा घाटों के प्रबन्धन करने हेतु नियम व शर्ते
1. गंगा घाटों को रख-रखाव, साफ-सफाई, सौन्दर्यकरण आदि के प्रबन्धन हेतु एक वर्ष के लिए दिया जायेगा, जिसकी अवधि 01 जनवरी 2021 से 31 दिसम्बर 2021 तक होगी। सम्बन्धित प्रबन्धन संस्था का कार्य संतोषजनक होने एवं मूल्यांकन एवं अनुश्रंवण समिति की संस्तुति के आधार पर अगले वर्ष हेतु नवीनीकरण किया जा सकता है। किसी भी घाट को अधिकतम एक समय पर 03 वर्ष के लिए ही प्रबन्धन हेतु दिया जायेगा।
2. अगले वर्ष हेतु किसी भी घाट के नवीनीकरण करने के लिए आवश्यक होगा कि नवीनीकरण हेतु प्रार्थना पत्र 01 दिसम्बर तक मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, उक्त समिति का अनुमोदन होने पर 15 दिसम्बर तक अंशदान इस हेतु खोले गये  ESCROW    बैंक खाता में जमा करना होगा तथा 31 दिसम्बर तक उक्त घाट के नवीनीकरण सम्बन्धित समस्त औपचारिकताऐं पूर्ण करनी होगी।  
3. गगा घाट के प्रबन्धन कार्य के आवंटन एवं नवीनीकरण करने की कार्यवाही मूल्याकंन एवं अनुश्रंवण समिति की संस्तुति पर की जायेगी।
4. निम्न गंगा घाटों का आवंटन नही किया जायेगाः-
1. वी0आई0पी0 घाट,
2. शमशान घाट,
3. हरकी पैडी घाट(घण्टाघर के सामने वाला),
4. हरकी पैडी घाट(घण्टाघर वाला),
5. नाई घाट,

5. निम्न गंगा घाटों को प्रबन्धन कार्य हेतु सैक्टरों के आधार पर आवंटित किया जा सकता हैः-
क्र.सं. गंगा घाटो का नाम सेक्टरों की संख्या क्र.सं. गंगा घाटो का नाम सेक्टरों की संख्या
1 अलकनंदा घाट 5 28 विश्वकर्मा घाट 2
2 बिरला घाट-पूर्वी 5 29 अग्रसेन घाट 1
3 विष्णु घाट-पूर्वी 4 30 पावन घाट 1
4 हाथी वाले पुल से सी0सी0आर0 2 31 प्रेम नगर आश्रम के सामने वाला घाट 1
5 पंतद्वीप पार्किग से भीमगोडा पुल 5 32 सिंहद्वार फलाई ओवर के पास वाला घाट 1
6 भीमगोडा से जयराम आश्रम 5 33 चैधरी चरण सिंह घाट 1
7 जयराम आश्रम से सर्वानंद घाट 6 34 स्वामी नारायण घाट 1
8 भागीरथी घाट 1 35 सीवर पम्पिंग वाला घाट 1
9 पतद्वीप घाट 2 36 पुलजटवाडा घाट (पश्चिमी) 2
10 सर्वानंद घाट 2 37 पुलजटवाडा घाट (पूर्वी) 2
11 लोकनाथ घाट 1 38 पंचायती अखाडा घाट 1
12 जय राम आश्रम व पंजाब सिंध 1 39 बैरागी कैम्प (पूर्वी) घाट 11
13 कांगडा घाट 5 40 बैरागी कैम्प (पश्चिमी) घाट 1
14 कुशा घाट 1 41 हरिभारती घाट 1
15 विष्णु घाट-पश्चिमी 1 42 महिला मिलन घाट 1
16 बिरला घाट-पश्चिमी 1 43 तारामाता मंदिर घाट 1
17 गणेश घाट 1 44 गंगेश्वर मंदिर घाट 1
18 बैराज कालोनी घाट 1 45 सती घाट (पूर्वी) 5
19 ओम पुल 3 46 सती घाट (पश्चिमी व मध्य) 6
20 डाम कोठी 2 47 राधा कृष्ण मंदिर घाट 1
21 लव कुश घाट 1 48 राज घाट 1
22 मालवीय घाट 1 49 शमशान घाट-कनखल 1
23 कश्यप घाट 1 50 दक्ष घाट (पूर्वी) 3
24 राम घाट 1 51 दक्ष घाट (पश्चिमी) 2
25 शिवजी घाट 1 52 श्रीयन्त्र मन्दिर घाट 1
26 गोविन्द घाट (नया) 2 53 हरिगिरी घाट 1
27 गोविन्द घाट (पुराना) 2 कुल घाट 114
6. गंगा घाट के प्रबन्धन कार्य के आवंटित सैक्टर पर मात्र साफ सफाई, सौंन्दर्यकरण, रख-रखाव तथा मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी सम्बन्धित संस्थान को ही करनी होगी। यह किसी भी रूप में स्वामित्व अथवा घाट का आवंटन नही माना जायेगा।
7. गंगा घाट के प्रबन्धन कार्य के आवंटित सैक्टर पर यदि किसी प्रकार का रख-रखाव, सौन्दर्यकरण एवं मरम्मत का कार्य कराया जाना आवश्यक होगा, तो मूल्याकंन एवं अनुश्रंवण समिति की पूर्व लिखित अनुमति के उपरान्त ही उक्त कार्य प्रारम्भ किये जायेगे।

 
8. गंगा घाटों के प्रबन्धन कार्य के आवंटित सैक्टर लेने के इच्छुक सम्बन्धित संस्था/व्यक्ति द्वारा निम्न तालिका के अनुसार अंशदान वहन करना होगा। प्रथम वर्ष में ही कुछ मूलभूत सुविधाओ/आवश्यकताओं को स्थापित करना होगा, जो सभी घाटों हेतु एक समान रूप में निर्धारित मानकों के अनुरूप होगी। एक वर्ष के प्रबन्धन कार्य के आवंटित सैक्टर हेतु निम्न प्रकार मदों के अनुसार अंशदान वहन करना होगा:-  
क्र.सं. कार्यमद प्रथम वर्ष का अंशदान, रू0
1
बहुउद्देशीय कर्मचारी 2 शिफ्टो में, प्रातः 5ः00 बजे से अपरान्ह 1ः00 बजे तक, अपरान्ह 1ः00 बजे से रात 9ः00 बजे तक, मानदेय रू0 12000 प्रति कार्मिक,   2ए88ए000
2 संपर्क का साधन, वाॅकी-टाॅकी/मोबाईल आदि 6ए000
3 घाट का सौन्दर्यकरण, पेन्टिंग, मरम्मत आदि 20ए000
4 कूडेदान, कपड़ा एवं पुष्प कलश, सफाई संसाधन 10ए000
5 बडे साईज का सूचना पट्ट, वाॅल संदेश 30ए000
6 अस्थाई चेन्जिंग रूम 40ए000
7 अस्थाई विश्राम स्थल का निर्माण 1ए00ए000
8 आकस्मिक व्यय 6ए000
  योग 5ए00ए000
9. यदि कोई संस्था/व्यक्ति सम्बन्धित प्रबन्धन कार्य हेतु आवंटित सैक्टर को एक ही समय में 03 वर्ष तक लेना चाहता है, तो उसको निम्न प्रकार अंशदान वहन करना होगा:-
क्र.सं. कार्यमद प्रथम वर्ष का अंशदान, रू0 द्वितीय वर्ष का अंशदान रू0 तृतीय वर्ष का अंशदान रू0
1
बहुउद्देशीय कर्मचारी 2 शिफ्टो में, प्रातः 5ः00 बजे से अपरान्ह 1ः00 बजे तक, अपरान्ह 1ः00 बजे से रात 9ः00 बजे तक, मानदेय रू0 12000 प्रति कार्मिक,   2ए88ए000 2ए88ए000 2ए88ए000
2 संपर्क का साधन, वाॅकी-टाॅकी/मोबाईल आदि 6ए000 6ए000 6ए000
3 घाट का सौन्दर्यकरण, पेन्टिंग, मरम्मत आदि 20ए000 – –
4 कूडेदान, कपड़ा एवं पुष्प कलश, सफाई संसाधन 10ए000 – –
5 बडे साईज का सूचना पट्ट, वाॅल संदेश 30ए000 – –
6 अस्थाई चेन्जिंग रूम 40ए000 – –
7 अस्थाई विश्राम स्थल का निर्माण 1ए00ए000 – –
8 आकस्मिक व्यय 6ए000 6ए000 6ए000
  योग 5ए00ए000 3ए00ए000 3ए00ए000
10. गंगा घाटों के प्रबन्धन कार्य के आवंटित सैक्टर हेतु उपयोग किये जाने वाला अंशदान संस्था/व्यक्ति द्वारा  ESCROW     बैंक खाता में जमा किया जायेगा। उक्त  ESCROW     बैंक खाते का संचालन नगर आयुक्त, नगर निगम, हरिद्वार एवं सम्बन्धित संस्था/व्यक्ति के द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।
11. गंगा घाटों के प्रबन्धन कार्यो का मूल्यांकन एवं अनुश्रवण करने हेतु निम्न प्रकार मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति गठित की जाती है, जो समय-समय पर गंगा घाटों की साफ-सफाई आदि के सम्बन्ध में मूल्यांकन एवं अनुश्रवण कार्यो की त्रैमासिक रिपोर्ट जिला गंगा संरक्षण समिति, हरिद्वार की बैठक में प्रस्तुत करेगीः-
1. नगर आयुक्त, हरिद्वार                                  अध्यक्ष,
2. सिंचाई विभाग उत्तराखण्ड, हरिद्वार द्वारा नामित प्रतिनिधि,     सदस्य,
3. सिंचाई विभाग उ0प्र0, हरिद्वार द्वारा नामित प्रतिनिधि,          सदस्य,
4. उपजिलाधिकारी, हरिद्वार द्वारा नामित प्रतिनिधि,              सदस्य,
5. मुख्य कोषाधिकारी द्वारा नामित प्रतिनिधि,                     सदस्य,
6. जिला गंगा संरक्षण समिति, हरिद्वार द्वारा नामित प्रतिनिधि,      सदस्य,
7. पुलिस विभाग द्वारा नामित प्रतिनिधि,                        सदस्य
12. गंगा घाटों पर तैनात कार्मिकों का मानदेय प्र्रति माह रू0 12000/ होगा, जो सभी कार्मिकों हेतु एक समान होगा तथा श्रमिक कानून का पूर्णतः पालन करना होगा। मानदेय सम्बन्धित कार्मिक के बैंक खाते में देना होगा, जिसकी डवदपजवतपदहए  Monitoring,  ESCROW  बैंक खाते के माध्यम से की जायेगी।
13. उपरोक्त वर्णित मूलभूत आवश्कताओं/सुविधाओं के अतिरिक्त यदि कोई संस्था/व्यक्ति गंगा घाट के संरक्षण हेतु किसी भी प्रकार का व्यय करना चाहता है तो मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति से उसकी पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी।
14. मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि उक्त गंगा घाट पर किये जाने वाले कार्यो में किसी भी सरकारी/गैर सरकारी योजना में कराये जाने वाले कार्यो की  Duplicacy     कदापि न होने पाये।
15. प्रबन्धन कार्य हेतु आवंटित सैक्टर पूर्ण रूप से सार्वजनिक होगें, जिन पर कोई भी कभी भी आवागमन कर सकता है। जनसामान्य के आने-जाने पर कोई भी प्रतिबन्ध नही होगा और न ही किसी से कोई शुल्क लिया जायेगा।
16. गंगा घाटों पर कार्मिकों की तैनाती से पूर्व सम्बन्धित संस्था/व्यक्ति द्वारा कार्मिकों का पूर्ण विवरण, आधार कार्ड, फोटों, फोन नं0 आदि सम्बन्धित पुलिस थाने को देकर उसका पुलिस सत्यापन कराना होगा।
17. गंगा घाटों पर तैनात किये जाने वाले कार्मिकों यह सुनिश्चित करना होगा कि वे स्वयं घाट पर किसी प्रकार की प्रतिबन्धित क्रियाकलाप/हरकतें नही करेगे व न संलिप्त रहेगे।
18. सभी घाटों पर मालिकाना हक सिंचाई विभाग का ही होगा।
19. संस्था/व्यक्ति द्वारा सम्बन्धित गंगा घाट पर किसी भी प्रकार की व्यवसायिक गतिविधियां सम्पादित नही करायी जाएगी।
20. संस्था/व्यक्ति द्वारा यह सुनिश्चित कराया जाएगा कि गंगा घाट पर पाॅलीथीन का प्रयोग, धूम्रपान, गुटका, मंास-मदिरा एवं किसी भी प्रकार का नशा सम्बन्धित गतिविधियां संचालित न हो।
21. संस्था/व्यक्ति द्वारा यह सुनिश्चित कराया जाएगा कि गंगा घाट पर अधार्मिक, गैरकानूनी एवं प्रतिबंधित गतिविधियां संचालित न हो एवं किसी भी घाट पर अतिक्रमण कटापि न होने पाये।
22. संस्था/व्यक्ति द्वारा यह सुनिश्चित कराया जाएगा कि गंगा घाट पर आरती पूजन एवं अन्य धार्मिक गतिविधियों से सम्बन्धित किसी भी प्रकार का शुल्क यात्री एवं श्रद्धालुओं से नही लिया नही जाएगा।
23. संस्था/व्यक्ति द्वारा सम्बन्धित घाट पर प्रतिदिन हेतु 02 बहुउद्देशीय कर्मचारी तैनात किये जायेगे। जिनमें प्रत्येक की डयूटी प्रातः 5.00 बजे से दोपहर 1.00 बजे तक एवं दोपहर 1.00 से रात्रि 9.00 बजे तक होगी।
24. गंगा घाट पर तैनात बहुउद्देशीय कर्मचारी को प्रतिवर्ष 02 वर्दी संस्था/व्यक्ति द्वारा दी जायेगी, जिसका डिजाइन जिला गंगा संरक्षण समिति, हरिद्वार द्वारा निर्धारित किया जायेगा।
25. किसी संस्था एवं व्यक्ति द्वारा गंगा घाट को प्रबन्धन कार्य हेतु लेने के सम्बन्ध में आवेदन के रूप में एक निर्धारित प्रारूप पर शपथ पत्र देना पडेगा।
26. गंगा घाट को प्रबन्धन कार्य हेतु लेने के उपरान्त संस्था/व्यक्ति द्वारा किसी भी प्रकार का गंगा घाट पर स्थायी प्रकृति का निर्माण नही कराया जाएगा।
27. प्रबन्धन हेतु प्रत्येक आवंटित सैक्टर पर एक सुझाव पंजिका रखी जायेगी, जिसमें कोई भी अपने सुझाव/शिकायत दर्ज कर सकता है। उक्त सुझाव/शिकायत को मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा, जिस पर मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति तद्नुसार कार्यवाही करेगी।
28. किसी भी शर्त का उल्लघंन अथवा नियमों/आदेशों के उल्लंघन की शिकायत प्राप्त होने पर अथवा स्वतः संज्ञान लिए जाने पर मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति के माध्यम से जाॅच की जायेगी। जाॅच के उपरान्त आख्या जिलाधिकारी को प्रेषित की जायेगी। जिलाधिकारी की ओर से सम्बन्धित संस्था/व्यक्ति को सुनवाई का एक अवसर देकर उचित निर्णय लिया जायेगा। किसी भी समय घाटों का आवंटन जिलाधिकारी की ओर से निरस्त किया जा सकता है।
29. संस्था/व्यक्ति द्वारा मा0 न्यायालयों, मा0 एन0जी0टी0, शासन एवं प्रशासन द्वारा समय-समय पर निर्गत नियमों का पूर्णतः पालन करना/कराना होगा।

 
 शपथ-पत्र,(ड्राफ्ट)
गंगा घाट को प्रबन्धन कार्य लेने हेतु
समक्ष:
नगर आयुक्त/अध्यक्ष,
मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति,
(योजना का नाम…………………………………………..)
हरिद्वार
शपथ कर्ता:   मै/हमारी संस्था ………………………………………………………………………….
मै/हमारी संस्था शपथ पूर्वक निम्नलिखित ब्यान करता हॅॅू कि:-
1. यह कि मैरा/हमारी संस्था का उपरोक्त नाम व पता सब सच व सही है।
2. यह कि मै/हमारी संस्था गंगा घाट…………………………….के सैक्टर सं0 ………………..केे प्रबन्धन कार्य, यथा साफ-सफाई, रखरखाव एवं मरम्मत कार्यो को स्वेच्छा से पूर्ण आस्था के साथ करना चाहता हूॅ।
3. यह कि मैने/हमारी संस्था ने गंगा घाट के आवंटित सैक्टर के प्रबन्धन कार्य हेतु निर्धारित नियम/शर्तो को पूर्णतः समझ एवं पढ़ लिया गया है, जिन पर हमको कोई आपत्ति नही है। हमारे द्वारा उक्त सभी निर्धारित नियमों/शर्तो का पूर्ण आस्था/निष्ठा के साथ पालन किया जायेगा।
4. यह कि मेरे/हमारी संस्था द्वारा भविष्य में उक्त निर्धारित नियमों/शर्तो का यदि किसी भी प्रकार से उल्लघंन होता है तो आपको पूर्ण अधिकार होगा कि उक्त आवंटन को निरस्त कर दे।
5. यह कि उक्त शपथ-पत्र के पैरा नं0 01 से 04 तक मेरे निजी ज्ञान व विश्वास में सब सच व सही है। इसमें कोई तथ्य छिपाया नही गया है। सत्यता के लिए माॅ गंगा मेरी मदद करे।

दिनांक:                                                      

                                                        शपथ कर्ता:  

गंगा घाट को प्रबन्धन कार्य लेने हेतु आवेदन पत्र (ड्राफ्ट)
सेवा में
नगर आयुक्त/अध्यक्ष,
मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति,
(योजना का नाम…………………………………………………)
हरिद्वार
विषय:  गंगा घाट…………………………………………..के सैक्टर सं0 …………..को प्रबन्धन कार्य हेतु आवंटित किये जाने के सम्बन्ध में।  

महोदय,
 बडे हर्ष का विषय है कि गंगा नदी की स्वच्छता एवं संरक्षण के उद्देश्य के दृष्टिगत् जिला गंगा संरक्षण समिति, हरिद्वार के अथक प्रयास से गंगा घाटों के प्रबन्धन, यथा साफ-सफाई, रखरखाव एवं मरम्मत कार्यो में (योजना का नाम…………………………………) योजना के अन्तर्गत जन साधारण का सकारात्मक सहयोग प्राप्त किया जा रहा है, जिसमें जन साधारण द्वारा स्वेच्छा से गंगा घाटों के प्रबन्धन कार्य, यथा साफ-सफाई, रखरखाव एवं मरम्मत कार्यो में पूर्णतः सहर्ष सहयोग प्रदान किया जायेगा।
मै/हमारी संस्था………………………………………………………………………………………………………………………… द्वारा भी गंगा घाट………………………………………के सैक्टर सं0……………………………को प्रबन्धन कार्य, यथा साफ-सफाई, रखरखाव एवं मरम्मत कार्यो को स्वेच्छा से पूर्ण आस्था के साथ करना चाहता हूॅ। मुझे/हमारी संस्था ………………………………………………………………………………………………………………..को उक्त गंगा घाट के आवंटित किये जाने वाले सैक्टर के प्रबन्धन कार्य हेतु निर्धारित समस्त नियम/शर्ते सहर्ष स्वीकार है।
अतः आपसे अनुरोध है कि मुझको/हमारी संस्था……………………………………………………………….को गंगा घाट………………………………………के सैक्टर सं0 …………………………को प्रबन्धन कार्य, यथा साफ-सफाई, रखरखाव एवं मरम्मत कार्य को करने हेतु आवंटित करने की कृपा करे। मै/हमारी संस्था…………………………………………………………………………………………आपको पूर्ण विश्वास दिलाते है कि उक्त गंगा घाट के आवंटित सैक्टर के प्रबन्धन कार्यो को निर्धारित नियमों/शर्तो के साथ पूर्ण आस्था/निष्ठा के साथ सहर्ष सम्पादित करूॅगा। यदि गंगा घाट के प्रबन्धन कार्यो में मुझसे/हमारी संस्था से किसी भी नियम/शर्त का अनुपालन नही किया जाता है तो आपको पूर्ण अधिकार होगा कि उक्त गंगा घाट के आवंटित सैक्टर को तत्काल निरस्त कर दें।
दिनांक:                                                      भवदीय,

नाम: …………………………………..
संस्था:…………………..……………..
पता:……………………..………………
………………………………………………
……………………………………………..
फोन नं0………………………………

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