हरिद्वार समाचार– श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रह्मलीन श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज की षोडशी पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई और अखाड़े में शब्द कीर्तन कर विश्व कल्याण की कामना की गई। इस दौरान श्रद्धालु संगत को संबोधित करते हुए कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज ने कहा कि श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज का आकस्मिक निधन संपूर्ण संत समाज एवं प्रत्येक वर्ग के लिए अपूरणीय क्षति है। जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। ब्रह्मलीन श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज गो, गंगा, गायत्री के प्रबल समर्थक थे। जिन्होंने संपूर्ण जीवन भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए समर्पित किया। राष्ट्र निर्माण में उनका अतुल्य योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। ऐसे महापुरुष के आकस्मिक निधन पर एक युग का अंत हुआ है। ज्ञानी महंत खेम सिंह महाराज ने कहा कि श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज एक कुशल नेतृत्व के धनी संत थे। जिन्होंने प्रत्येक कुंभ मेले में 13 अखाड़ों के बीच समन्वय स्थापित कर सभी कुंभ मेलों को सकुशल संपन्न कराया। समाज कल्याण में उनका अतुल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। महंत बीवी छोटों कौर एवं संत निर्भय सिंह ने कहा कि ब्रह्मलीन श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज एक महान संत थे। उन्होंने सदैव युवा पीढ़ी को संस्कारवान बनाकर धर्म एवं संस्कृति की रक्षा के लिए प्रेरित किया और विभिन्न सेवा प्रकल्पों के माध्यम से समाज को सेवा का संदेश दिया। ऐसे महापुरुषों को संत समाज नमन करता है। युवा पीढ़ी को उनके अनुकरणीय जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना सहयोग प्रदान करना चाहिए। समाजसेवी देवेंदर सिंह सोढ़ी ने कहा कि ब्रह्मलीन श्रीमहंत नरेंद्र गिरी महाराज एक दिव्य महापुरुष थे। जिन्होंने जीवन पर्यंत सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार में अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया और समय-समय पर धर्म से जुड़े मुद्दों को समाज के समक्ष उठाया। उन्होंने फर्जी संतों पर कार्यवाही कर समाज को धर्म के प्रति भी जागृत किया ऐसे महापुरुषों को संत समाज सदैव स्मरण करता रहेगा। इस अवसर पर संत सिमरन सिंह, संत हरजोध सिंह, संत मनप्रीत सिंह, संत जनरैल सिंह, संत तलविंदर सिंह, संत जसकरण सिंह, संत सुखमण सिंह, समाजसेवी देवेंदर सिंह सोढ़ी, विष्णु सिंह, ज्ञानी जैल सिंह उपस्थित रहे।

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