हरिद्वार–  जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा है कि भारत की गौरवशाली संत परंपरा आज पूरी दुनिया का मार्गदर्शन कर रही है। महापुरुषों का तपोबल युवा पीढ़ी के साथ समस्त समाज को ज्ञान की प्रेरणा दे रहा है। जयराम संस्था समाज सेवा के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जोकि बेहद सराहनीय है। भीमगोड़ा स्थित जयराम आश्रम में स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज के अवतरण दिवस पर आयोजित संत समागम को संबोधित करते हुए आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ऊर्जावान एवं कर्म योगी संत हंै। जो अपने गुरु के आदर्शो को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। संत समाज उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है। काष्र्णि पीठाधीश्वर स्वामी गुरुशरणानंद महाराज ने कहा कि महापुरुषों का अवतरण समाज के उद्धार के लिए होता है। स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने संत परंपरा का निर्वहन करते हुए जिस प्रकार अपने गुरु द्वारा प्रारंभ किए गए सेवा प्रकल्पों को आगे बढ़ाकर संस्था के कार्य में उन्नति की है। वह युवा संतो के लिए प्रेरणा का केंद्र है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि संतों का जीवन निर्मल जल के समान होता है और एक सच्चे महापुरुष के रूप में संत ही अपने भक्तों को ज्ञान की प्रेरणा देकर उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। सुयोग्य शिष्य के रूप में ब्रह्मलीन स्वामी देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज को स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज की प्राप्ति हुई और उन्हीं के आशीर्वाद से आज वह अपने कार्यों का निर्वहन करते हुए देश दुनिया में भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। कार्यक्रम में पधारे सभी संत महापुरुषों का आभार व्यक्त करते हुए स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि वह सौभाग्यशाली हैं कि पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने उन्हें देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा हरिद्वार के गंगा तट पर जो आशीर्वाद दिया था। वह फलीभूत हो रहा है। पूज्य गुरूदेव द्वारा दिखायी गयी सत्य की राह पर चलते हुए उन्हें संत समाज के बीच रहकर सेवा और धार्मिक कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। समाज के गरीब, असहाय, जरूरतमंद परिवारों और संत समाज की सेवा करना ही उनके जीवन का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि आज युवा संतो के कंधों पर धर्म और संस्कृति के संरक्षण संवर्धन का भार टिका हुआ है। युवा संतो को नौजवान पीढ़ी को जागरूक करना चाहिए कि वह पश्चिमी सभ्यता का त्याग कर नशे से दूर रहे और अपने धर्म एवं संस्कृति का ज्ञान सभी को प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि अपने गुरु के जीवन से प्रेरणा लेते हुए संतों की सेवा करते रहना और समाज कल्याण में अपना सहयोग प्रदान करना ही उनका उद्देश्य रहेगा। महामंडलेश्वर स्वामी उमाकांतानंद सरस्वती एवं महंत जसविंदर सिंह महाराज ने कहा कि संत परंपरा से पूरी दुनिया में भारत की एक अलग पहचान है। जयराम आश्रम संस्था ना केवल धार्मिक क्रियाकलापों के लिए बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में अतुल्य योगदान के लिए भी विश्व विख्यात है। जिसके लिए स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज बधाई के पात्र हैं। संत समाज ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वह सदैव अपने जीवन में उन्नति की ओर अग्रसर रहें। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज को अवतरण दिवस की बधाई देते हुए कहा कि जयराम आश्रम द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न सेवा प्रकल्प सभी को प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम के दौरान भजन गायक अजय याज्ञनिक ने ऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगन आदि भक्तिगीत प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथीयों को भक्तिरस मे सराबोर कर दिया। डीएसबी इन्टरनेशनल पब्लिक स्कूल ऋषिकेश के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि, स्वामी ज्ञानानंद शास्त्री, महंत जमुना दास, महंत दामोदर दास, महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, स्वामी ऋषि रामकृष्ण, श्रीमहंत विष्णु दास, महंत रघुवीर दास, महंत सूरज दास, महंत अरुण दास, महंत प्रह्लाद दास, स्वामी राजेंद्रानंद, राजस्थान की कैबिनेट मंत्री ममता भूपेश, हरियाणा के पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, मकबूल कुरैशी, रिजवान कुरैशी, आदि उपस्थित रहे। समाजसेवी रामलाल गोयल, सुमित गोयल, विजेंद्र गोयल, मंगतराम सिंघल, राजेंद्र गुप्ता, अनिल सोढ़ानी, कुलदीप शर्मा, राजेंद्र गर्ग, संजय सिंघल, ओमप्रकाश बागला, गोवर्धन अग्रवाल, खरेड़ी दास, राजेश शिवपुरी, सोनी मिश्रा, जयपाल सिंह, सुनील कुमार आदि ने कार्यक्रम में पधारे सभी संत महापुरुषों का फूल माला पहनाकर स्वागत किया।

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