हरिद्वार समाचार- महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि महाराज ने कहा है कि श्रीमद् भागवत कथा भवसागर की वैतरणी है। जो व्यक्ति के मन से मृत्यु का भय हटाकर उसके बैकुंठ का मार्ग प्रशस्त करती है। श्रद्धा पूर्वक भागवत कथा का श्रवण करने से भक्तों के जीवन के सभी दुश्वारियां दूर होती है और उनका जीवन सदैव उन्नति की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा पतित पावनी मां गंगा की भांति अविरल बहने वाली ज्ञान की अमृतधारा है। जिसे जितना ग्रहण करो उतनी ही जिज्ञासा बढ़ती है और प्रत्येक सत्संग से अधिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड और पतित पावनी मां गंगा के तट पर भागवत कथा का श्रवण सौभाग्यशाली व्यक्ति को प्राप्त होता है। जन्म जन्मांतर के पापों का शमन श्रीमद् भागवत कथा के दर्शन मात्र से ही हो जाता है। स्वामी कमलानंद गिरि महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी और कलयुग में भी इसके साक्षात प्रमाण देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत देवताओं को भी दुर्लभ है। स्वामी गिरिशानंद गिरी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कल्पवृक्ष के समान है। जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है। श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से व्यक्ति परमात्मा की शरण में पहुंचता है और उसका जीवन स्वयं ही सफल हो जाता है। इसलिए समय निकालकर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए और भावी पीढ़ी को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि की अध्यक्षता में पंडित भागवत शरण के मुखारविंद से श्री कल्याण कमल आश्रम चैरिटेबल ट्रस्ट में विगत 5 दिनों से श्रीमद् भागवत कथा चल रही है। सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क आदि कोरोना नियमों का पालन करते हुए आयोजित की जा रही मंगलमयी श्रीमद् भागवत कथा लोगों के लिए प्रेरक बनती जा रही है। आज की कथा में गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास पंडित भागवत शरण ने कहा प्रकृति का आदर किए बिना सृष्टि आधार विहीन हो जाएगी। जिस प्रकार हम अपना ख्याल रखते हैं। उसी प्रकृति को प्रदूषण रहित बनाने के लिए सभी को मिलकर सहयोग करना चाहिए। इस दौरान माता गंगा देवी, चंद्रपाल, रूक्मणी देवी, सुमन, टिंकू मोंगाख्, हरजीत दुग्गल, शिव धवन, पंडित चंद्रमणी शर्मा, सूरज शर्मा, अश्विनी कोच्छड़, रोमी शर्मा, रवि गिरी, जीतेश मोंगा, राकेश गुप्ता आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने कथा का श्रवण किया।
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