हरिद्वार समाचार- भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज ने कुंभ को लेकर जारी की गयी एसओपी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार के हरिद्वार में आयोजित किए जा रहे कुम्भ महापर्व पर भण्डारों, सामूहिक भजन-कथाओं पर रोक लगाने से संत समाज को अत्यंत कष्ट हुआ है। इसे सरकार की मानसिकता व मंशा उजागर हो गयी है। दण्डि स्वामी भूमानन्द तीर्थ सन्यास संस्थान की ओर से जारी प्रैस विज्ञप्ति में स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कल्पवास चल रहा है। जिसमें मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी आदि कई शुभ अवसरों पर करोड़ों लोग वहां गंगा स्नान करेंगे। लेकिन सरकार कुंभ को सीमित करने का प्रयास कर रही है। कुंभ महापर्व को लेकर फतवे की तरह बेहद कठिन एसओपी जारी की गयी है। स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि सरकार ने साम दाम दण्ड भेद की नीति अपनाते हुए प्रत्येक अखाड़े को एक-एक करोड़ दिया है। जिससे कुंभ को सीमित करने के सरकार के प्रयासों पर अखाड़े चुप्पी साधे हुए हैं। जबकि अखाड़ों के पास स्वयं की करोड़ों रूपए की संपत्ति है। सरकार के इतना बड़ा आदेश पारित करने के बाद भी अखाड़ों ने एक बार भी कुंभ मेले का बहिष्कार करने की बात नहीं की। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे गरीब राज्य में अखाड़ों को एक-एक करोड़ रूपए देना गलत परम्परा है। अखाड़े आगे चलकर सरकार से ओर अधिक धन की मांग करेंगे। उन्होंने सभी अखाड़ों से निवेदन किया है कि संत परंपरा का पालन करते हुए सरकार से मिली एक-एक करोड़ रूपए की धनराशि पर 10-10 लाख रूपए रखकर सरकार को वापस कर दें। स्वामी अच्यूतानंद तीर्थ महाराज ने सरकार से भी अपील की है कि हरिद्वार में होने वाले कुम्भ महापर्व की गरिमा को दृष्टिगत रखते हुए कुंभ स्नान के लिए तीर्थनगरी हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं, भक्तगणों एवं संत समाज के प्रति सद्भावनापूर्वक विचार कर निर्णय करें। जिससे भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता पर कोई प्रभाव ना पड़े।

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